चमोली जिले में भालू का आतंक लगातार बढ़ने से ग्रामीण दहशत में

  1. उत्तराखंड के चमोली जिले में भालू का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और ग्रामीणों की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही। कई क्षेत्रों में रोजाना भालू देखे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। दूर-दराज के गांवों में बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना होता है, ऐसे में वे रास्ते में भालू के खतरे से बचने के लिए सीटियां बजाते और शोर मचाते हुए स्कूल जाते हैं। लौटते समय भी वे इसी तरह सावधानी बरतते हैं।

जब तक बच्चे सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाते, अभिभावकों की चिंता बनी रहती है। कई गांवों में माता-पिता समूह बनाकर बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाते हैं। चमोली जिले के गोपेश्वर से लेकर ज्योतिर्मठ और पोखरी विकासखंड तक कई जगहों पर भालू सक्रिय हैं। ग्रामीणों को खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। दशोली ब्लॉक के स्यूंण गांव से जनता इंटर कॉलेज बेमरू जाने वाले बच्चों को चार से पांच किलोमीटर लंबा जंगली रास्ता पार करना पड़ता है।

भालू और अन्य जंगली जानवरों से बचाव के लिए बच्चे समूह में चलते हैं और जोर-जोर से आवाजें करते हैं ताकि कोई जानवर आसपास हो तो दूर हट जाए। स्थानीय निवासी धीरेंद्र राणा का कहना है कि बच्चे घर लौटने तक परिवारजन चिंतित रहते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस क्षेत्र में सुरक्षा के विशेष इंतजाम करने की मांग की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इधर, ज्योतिर्मठ ब्लॉक के थैंग गांव में भालू अब तक 50 से अधिक मवेशियों को मार चुका है। गांव के हाईस्कूल में धीवाणी, कांडखोला और ग्वाड़ के 20–25 छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं, जिन्हें दो किलोमीटर जंगली रास्ता तय करना पड़ता है। क्षेत्र पंचायत सदस्य रमा देवी और ग्राम प्रधान मीरा देवी ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय के छोटे बच्चों को तो अभिभावक समूह बनाकर स्कूल छोड़ने जाते हैं, लेकिन बड़े बच्चों को लेकर चिंता बनी रहती है क्योंकि उन्हें खुद ही खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ता है।

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