उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल की तैयारी में है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब राज्य इकाई में भी बदलाव की आहट तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं से दूरी बनाने के मूड में है, जिनकी छवि को लेकर आम जनता में नकारात्मक धारणा बनी है। संगठन की कोशिश है कि चुनावी दौर में विवादित चेहरे फ्रंटलाइन में नजर न आएं। इसके बजाय बेदाग, साफ-सुथरी छवि और जनस्वीकार्यता वाले नेताओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
लगातार नौ वर्षों से सत्ता में काबिज भाजपा उत्तराखंड में तीसरी बार सरकार बनाने की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है। सभी सात मोर्चों के अध्यक्षों और उनकी टीमों की घोषणा के बाद अब संगठन किसी भी स्तर पर कमजोरी नहीं छोड़ना चाहता।
बताया जा रहा है कि ऐसे नेताओं को बदले जाने की कवायद शुरू हो गई है, जो हाल के वर्षों में या पूर्व में किसी न किसी विवाद से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व स्पष्ट रूप से नहीं चाहता कि चुनाव के दौरान ऐसे चेहरे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाएं।
इस संभावित फेरबदल में युवाओं को खास तवज्जो दिए जाने के संकेत भी मिल रहे हैं। हाल के संगठनात्मक बदलावों में युवाओं को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ऐसे में एक बार फिर दूसरी पंक्ति के नेताओं को आगे लाकर संगठन न केवल युवा और नए मतदाताओं को जोड़ने पर फोकस करेगा, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की मजबूत कतार भी तैयार की जाएगी।









