
हल्द्वानी
चारा काटने की मशीन से हुआ एक भीषण हादसा एक महिला की दुनिया उजाड़ सकता था। हाथ से पूरी तरह कटा हुआ अंगूठा, आँखों में डर, दिल में अनगिनत सवाल—क्या अब हाथ कभी पहले जैसा हो पाएगा? क्या यह अंग हमेशा के लिए खो गया?
परिजन कटे हुए अंगूठे को अलग पैकेट में संभालकर उम्मीद की आख़िरी डोर थामे हल्द्वानी के 3–4 निजी अस्पतालों तक पहुँचे, लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला—
“अब इसे जोड़ना संभव नहीं है।”
हादसे के लगभग 6 घंटे बाद, जब उम्मीदें लगभग दम तोड़ चुकी थीं, मरीज को चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी लाया गया। यहाँ हालात बदले।
यहाँ मरीज नहीं, इंसान देखा गया…
यहाँ समय नहीं गँवाया गया…
और यहाँ हार नहीं मानी गई।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मरीज को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। लगभग 5 घंटे तक चली अत्यंत जटिल माइक्रो सर्जरी के बाद डॉक्टरों की टीम ने वह कर दिखाया, जिसे कई जगह असंभव कहा गया था—
कटे हुए अंगूठे को फिर से हाथ से जोड़कर उसमें नई जान डाल दी गई।
इस जीवन बदल देने वाली सर्जरी का नेतृत्व किया डॉ. सारिका गंगवार, वरिष्ठ प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन, चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी ने। उनकी कुशलता, अनुभव और धैर्य ने न सिर्फ एक अंग, बल्कि एक महिला की रोज़मर्रा की ज़िंदगी, आत्मसम्मान और भविष्य को बचा लिया।
डॉ. सारिका गंगवार के मार्गदर्शन में चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी में सभी प्रकार की आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी सुविधाएँ उपलब्ध हैं—
कटे हुए हाथ-पैर व उंगलियों को जोड़ने की सर्जरी,
माइक्रो सर्जरी,
दुर्घटना व ट्रॉमा रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी,
हाथ की सर्जरी,
जलने के घावों का इलाज,
कॉस्मेटिक एवं एस्थेटिक सर्जरी,
और जन्मजात विकृतियों का उपचार।
यह केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं,
यह भरोसे की जीत है…
यह चिकित्सा पर विश्वास की जीत है…
और यह साबित करता है कि जब इलाज के साथ इंसानियत जुड़ जाए, तो चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी जैसी जगहों पर असंभव भी संभव हो जाता है।
जहाँ उम्मीद टूटती है, वहीं से चंदन हॉस्पिटल इलाज की नई शुरुआत करता है।









